Sunday, November 30, 2008

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!!





सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
- By Shri Ram Prasad Bismil

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

करता नहीं क्यों दुसरा कुछ बातचीत,
देखता हूँ मैं जिसे वो चुप तेरी महफिल मैं है ।

रहबर राहे मौहब्बत रह न जाना राह में
लज्जत-ऐ-सेहरा नवर्दी दूरिये-मंजिल में है ।

यों खड़ा मौकतल में कातिल कह रहा है बार-बार
क्या तमन्ना-ए-शहादत भी किसी के दिल में है ।

ऐ शहीदे-मुल्को-मिल्लत मैं तेरे ऊपर निसार
अब तेरी हिम्मत का चर्चा ग़ैर की महफिल में है ।

वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,
हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है ।

खींच कर लाई है सब को कत्ल होने की उम्मींद,
आशिकों का जमघट आज कूंचे-ऐ-कातिल में है ।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है,
देखना है जोर कितना बाजुए कातिल में है ।

है लिये हथियार दुश्मन ताक मे बैठा उधर,
और हम तैय्यार हैं सीना लिये अपना इधर,

खून से खेलेंगे होली गर वतन मुश्किल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!

हाथ जिनमें हो जुनून कटते नही तलवार से,
सर जो उठ जाते हैं वो झुकते नहीं ललकार से,

और भडकेगा जो शोला सा हमारे दिल में है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!

हम तो घर से निकले ही थे बांधकर सर पे कफ़न,
जान हथेली में लिये लो बढ चले हैं ये कदम,

जिंदगी तो अपनी मेहमान मौत की महफ़िल मैं है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!

दिल मे तूफानों की टोली और नसों में इन्कलाब,
होश दुश्मन के उडा देंगे हमे रोको न आज,

दूर रह पाये जो हमसे दम कहाँ मंजिल मे है!
सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है!!